तिकुनियां-खीरी। श्रीजनता रामलीला कमेटी का 76 वा वार्षिक मेला उत्सव के दूसरे दिन नारद मोह और राम जन्म की लीला का मंचन अयोध्या से आई ड्रामा पार्टी द्वारा किया गया।
लीला के अनुसार देवर्षि नारद हिमालय की गुफा में तपस्या कर रहे थे,तपस्या से डरकर इंद्र ने कामदेव को तपस्या भंग करने के लिए भेजा, लेकिन कामदेव कामयाब नही हुए। इस घटना के बाद नारद को अहंकार हो गया और वह एक हो रहे स्वयंवर के लिए भगवान विष्णु से सुंदर रूप मांगने पहुंचे। भगवान विष्णु को नारद के अंदर व्याप्त हो चुके अहंकार की जानकारी थी तो उन्होंने माया करते हुए बंदर का रूप नारद जी को दे दिया। बंदर का रूप लेकर नारद जी जब स्वयंवर में गए तो उनका अपमान हुआ और नारद जी ने क्रोध में आकर भगवान विष्णु को श्राप दे दिया। जब माया हटी तो नारद जी को अपनी गलती का अहसास हुआ तो भगवान विष्णु ने कहा कि अहंकार भक्ति का सबसे बड़ा शत्रु है।
राजा दशरथ ने मंत्री सुमंत से गोद सूनी होने वंश को लेकर चिंता व्यक्त की। जिस पर मंत्री सुमंत ने गुरु वशिष्ठ से समाधान होने की बात कही। कुलगुरु वशिष्ठ ने राजा दसरथ को पुत्र को प्राप्त करने के लिए एक यज्ञ कराने की बात कही और यज्ञ की तैयारी शुरू हो गई। इस यज्ञ के बाद महारानी कौशल्या ने तेजस्वी पुत्र को जन्म दिया।जिससे अवध में आनंद छा गया।
इस अवसर पर कमेटी के महामंत्री अजय गर्ग,अतुल तिवारी,हंसराज गर्ग,आरपी मिश्र सहित भारी संख्या में महिलाएं व बच्चें मौजूद रहे।


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