तिकुनियां-खीरी। जसनगर से कैलाशपुरी तक बने करीब 12 किलोमीटर लंबे बंधे पर मोहाना नदी के बढ़ते दबाव को देखते हुए सिंचाई विभाग ने बचाव कार्य तेज कर दिया है। मंगलवार को एसडीएम यदुवीर सिंह ने मौके का निरीक्षण कर विभागीय अधिकारियों से कार्य की प्रगति जानी और नदी की स्थिति पर लगातार नजर रखने के निर्देश दिए।
जसनगर से कैलाशपुरी तक बने इस बंधे के समीप से मैलानी-नानपारा रेलवे ट्रैक भी गुजरता है। मोहाना नदी ने कटान करते हुए कई स्थानों पर बंधे के समानांतर बहना शुरू कर दिया है, जिससे जसनगर और कश्यपनगर क्षेत्र में बंधे के कटने का खतरा बढ़ गया है। बंधे को नुकसान होने की स्थिति में रेलवे ट्रैक पर भी खतरा उत्पन्न हो सकता है।
सिंचाई विभाग नदी की धारा को बंधे से दूर मोड़ने के लिए गैबियन और बोरियों में रोड़ा भरकर ठोकरें तैयार कर रहा है। विभाग के मुख्य अभियंता प्रभाकर प्रसाद ने भी पिछले सप्ताह क्षेत्र का निरीक्षण कर अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए थे। उन्होंने ग्रामीणों और किसानों को भरोसा दिलाया था कि बंधे को किसी प्रकार की क्षति नहीं होने दी जाएगी।
मंगलवार को निरीक्षण के दौरान एसडीएम यदुवीर सिंह ने अधिकारियों से बचाव कार्य की जानकारी ली और नदी के जलस्तर तथा कटान की स्थिति पर निरंतर निगरानी रखने के निर्देश दिए। सिंचाई विभाग के जेई ओपी सिंह ने बताया कि गिरिजा बैराज पर मोहाना नदी का जलस्तर फिलहाल खतरे के निशान से काफी नीचे है।
पुलिया कटने से बढ़ी किसानों की चिंता
कश्यपनगर निवासी किसान मंजीत सिंह ने बताया कि जिस स्थान पर सिंचाई विभाग बंधे को बचाने के लिए कार्य कर रहा है, उससे करीब 200 मीटर पूर्व स्थित एक पुलिया, जो नदी के कटान को रोकने में ठोकर का काम करती थी, आधी कट चुकी है। उनका कहना है कि यदि जल्द ही इस स्थान पर बचाव कार्य नहीं कराया गया तो नदी नया पिंड की ओर कटान करते हुए बंधे को भी भारी नुकसान पहुंचा सकती है।
बचाव कार्य के साथ नदी किनारे अरदास
जसनगर और कश्यपनगर गांवों में मोहाना नदी की विनाशलीला को रोकने के लिए एक ओर जहां सिंचाई विभाग दिन-रात बचाव कार्य में जुटा है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीणों की ओर से नदी किनारे अरदास भी की जा रही है।
मंगलवार को महंगापुर गुरुद्वारा के संत बाबा गुरुनाम सिंह के निर्देश पर पहुंचे बाबा लक्खा सिंह ने नदी किनारे पहुंचकर क्षेत्र की जनता की सुख-शांति और मोहाना नदी के कटान को रोकने के लिए अरदास की।
मोहाना नदी का जलस्तर दिन और रात में कई बार तेजी से घटता-बढ़ता रहता है। इसके चलते नदी किनारे रहने वाले ग्रामीणों और किसानों में लगातार चिंता बनी हुई है कि नदी कब किस दिशा में अपना रुख बदल ले। नदी में विचरण कर रहे घड़ियाल भी तटवर्ती ग्रामीणों के लिए चिंता का कारण बने हुए हैं।
बंधे की सुरक्षा और कटान रोकने के लिए सिंचाई विभाग की एसडीओ ज्योतिका नायक सहित कई जूनियर इंजीनियरों की टीम क्षेत्र में डेरा डाले हुए है और बचाव कार्य की लगातार निगरानी कर रही है।



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