तिकुनिया खीरी ।
रामलीला मेले के प्रथम दिन शंकर विवाह के लीला का मंचन किया गया । भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह केवल एक पौराणिक कथा ही नहीं बल्कि सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड और सृष्टि के लिए एक परम कल्याणकारी महोत्सव है ।
कथा के अनुसार माता सती के अग्नि कुंड में आत्मदाह के बाद उन्होंने पर्वतराज हिमालय और माता मेना के घर में देवी पार्वती के रूप में जन्म लिया । बालकपन से ही शिवजी को अपने पति के रूप में पाने की इच्छा के कारण उन्होंने हजारों वर्षों तक निर्जल , निराहार रहकर अत्यंत कठिन तपस्या की ।देवी पार्वती के अनन्य प्रेम और अडिग भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान भोलेनाथ ने उन्हें अपनी अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार किया ।
शंकर पार्वती विवाह में देवगण और मुनि के साथ शिवगण और अघोरी भी चल रहे थे , पशुपक्षी और जीवजंतु ने भी इस शादी में भाग लिया था । शिवजी शरीर पर भस्म लगाए , गले में नागों की माला डाले हुए और मस्तक पर चंद्रमा धारणकर जब बारात लेकर पहुंचे, तब शिव जी का विचित्र और डरावना रूप देखकर लोग अत्यंत भयभीत हो गए और शादी न करने की बात करने लगे । देवगण और मुनियों के समझाने के बाद अग्नि देव को साक्षी मानकर फेरे लिए गए और देवलोक और भूलोक पर पुष्पवर्षा हुई।
इस दौरान कार्यवाहक अध्यक्ष जितेंद्र गुप्ता , कोषाध्यक्ष शिशिर गुप्ता ,मंत्री अनुज कुमार गुप्ता , विशाल विश्वकर्मा, जगदीश कुमार , सुमेर , सतीश राणा सहित भारी संख्या में दर्शक मौजूद रहे।



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