तिकुनियां-खीरी। अपना आशियाना अपना ही होता है, लेकिन वक्त की मार के आगे इंसान बेबस हो जाता है। जसनगर गांव में मोहाना नदी के कटान ने 37 परिवारों को चौथी बार घर छोड़ने पर मजबूर कर दिया है। घरों के करीब नदी पहुंचने पर तहसील प्रशासन ने सभी परिवारों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाकर गांव के संविलियन विद्यालय में ठहरा दिया है। स्कूल के महज पांच कमरों और बरामदे में 37 परिवार किसी तरह जिंदगी गुजार रहे हैं।
ग्रामीणों के मुताबिक मोहाना नदी इससे पहले भी कई बार उनके आशियाने उजाड़ चुकी है। अब नदी एक बार फिर उनके घरों को अपने आगोश में लेने को बेताब है। स्कूल में रह रही सुमन, रामकुमारी, सुशीला, देवकी, रीना, छोटी और जमुना देवी आदि ने बताया कि बार-बार घर छोड़ने से परिवारों की जिंदगी मुश्किल हो गई है। उन्होंने प्रशासन से बंधे के दक्षिण दिशा में सुरक्षित जमीन उपलब्ध कराने की मांग की, ताकि हर साल बाढ़ और कटान के कारण उन्हें अपना घर न छोड़ना पड़े।
भोजन मिल रहा, लेकिन स्थायी समाधान की दरकार
पीड़ित परिवारों ने बताया कि सरकारी स्तर पर भोजन मिल रहा है, लेकिन यह स्थायी समाधान नहीं है। उन्होंने कहा कि आखिर कब तक बाढ़ और कटान का दंश झेलते रहेंगे। शासन-प्रशासन को उनके लिए सुरक्षित स्थान पर स्थायी आवास की व्यवस्था करनी चाहिए।
बीमारों को इलाज की भी परेशानी
सोनपती, झिनकी और शोभावती ने बताया कि स्कूल में रहने के दौरान बीमार होने पर भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। एक दिन डॉक्टरों की टीम आई थी और दवाएं देकर चली गई, लेकिन आराम नहीं मिला। बाद में बाजार से दवा खरीदनी पड़ी।
रोज पूड़ी से बच्चों को हो रही परेशानी
कक्षा नौ की छात्रा लक्ष्मी समेत कई बच्चों ने बताया कि उन्हें रोज पूड़ी ही दी जा रही है। खाने में बदलाव न होने के कारण पेट की समस्या होने लगी है। बच्चों ने भोजन में अलग-अलग तरह के खाद्य पदार्थ दिए जाने की मांग की।

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