निघासन (लखीमपुर खीरी)।
गेहूं खरीद के दौरान बोरे की कमी आड़े न आए, इसके लिए प्रशासन ने पहले से तैयारी शुरू कर दी है। कोटेदारों के पास राशन वितरण के बाद खाली पड़े जूट के बोरे वापस लेकर उन्हें खरीद प्रक्रिया में उपयोग करने का निर्णय लिया गया है। इस पहल से किसानों को काफी राहत मिलने की उम्मीद है।
पूर्ति विभाग ने तहसील क्षेत्र के 117 राशन डीलरों को निर्देश जारी किए हैं कि वे बीते माह खाद्यान्न वितरण के बाद खाली हुए जूट के बोरे तिकुनिया मंडी समिति में जमा करें। हर वर्ष गेहूं खरीद के समय बोरे की कमी एक बड़ी समस्या बन जाती है, जिससे खरीद की रफ्तार प्रभावित होती है।
इस बार प्लास्टिक के बोरे की संभावित कमी को देखते हुए विभाग ने पहले ही वैकल्पिक व्यवस्था तैयार कर ली है। खाद्य विपणन विभाग की मांग पर करीब 50 हजार जूट के बोरे एकत्र करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
ये बोरे पहले कोटेदार अपने पास ही रख लेते थे, लेकिन अब इन्हें संग्रहित कर खरीद केंद्रों तक पहुंचाया जाएगा। विभागीय अधिकारियों के अनुसार, शासन स्तर से निर्देश मिलने के बाद कोटेदारों को प्रति बोरा निर्धारित भुगतान भी किया जाएगा।
पूर्ति निरीक्षक रामसेवक यादव ने बताया कि कोटेदारों से एकत्र किए गए बोरे तिकुनिया मंडी में शासन द्वारा चयनित नोडल अधिकारी की निगरानी में रखे जा रहे हैं। लक्ष्य के मुकाबले तेजी से बोरे जमा हो रहे हैं। अधिकारियों का मानना है कि इस बार पर्याप्त बोरे उपलब्ध होने से गेहूं खरीद प्रक्रिया बिना किसी बाधा के सुचारु रूप से संचालित होगी।
— राकेश मौर्य, निघासन
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