जलवायु परिवर्तन के कारण भारत सहित दुनिया भर में मौसम चक्र प्रभावित हो रहा है। विश्व मौसम संगठन की रिपोर्ट के अनुसार, 2026 में जनवरी-मार्च के दौरान तापमान सामान्य से अधिक रहने की संभावना है। इस साल सर्दियों में कम बर्फबारी हुई है, और अल नीनो के कारण मानसून कमजोर होने व भीषण गर्मी पड़ने की आशंका है, जिससे कृषि उत्पादन पर गंभीर असर पड़ सकता है। ग्लेशियरों का पिघलना भी चिंता का विषय है।
नई दिल्ली, जागरण प्राइम । जलवायु परिवर्तन के चलते भारत सहित पूरी दुनिया के मौसम चक्र पर असर साफ दिखने लगे हैं। विश्व मौसम संगठन (WMO) की हालिया रिपोर्ट में कहा गया है कि 2026 में जनवरी से मार्च के बीच भारत सहित दुनिया के कई हिस्सों में तापमान सामान्य से ज्यादा रहने की आशंका है। वहीं बारिश भी असामान्य रह सकती है। इस साल सर्दियों के मौसम में अब तक पहाड़ों में बर्फबारी न के बराबर है। वहीं देश के ज्यादातर हिस्सों में बारिश भी सामान्य से बेहद कम है। दिसंबर 2025 में पश्चिमी हिमालय में रिकॉर्ड स्तर पर कम बर्फबारी दर्ज की गई। वहीं मौसम विभाग ने हाल ही में अपने पूर्वानुमान में बताया है कि जून-जुलाई-अगस्त के दौरान अल नीनो की स्थिति बनने की संभावना है। अल नीनो वाले वर्षों में भारत में मानसून कमजोर होता है और भीषण गर्मी पड़ती है। ऐसे में वैज्ञानिकों का मानना है कि इस साल असामान्य बारिश और गर्मी के चलते मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। इससे कृषि उत्पादन पर भी असर पड़ने की आशंका है।
विश्व मौसम संगठन की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, प्रशांत महासागर के कुछ हिस्सों में समुद्र की सतह का तापमान औसत से ज्यादा बना हुआ है। वहीं मध्य और पूर्वी प्रशांत में तापमान सामान्य से कम है। ये नीना जैसी स्थिति की ओर इशारा करते हैं। वहीं दूसरी तरफ भारतीय महासागर और उत्तरी अटलांटिक में भी सामान्य से ज्यादा गर्मी दर्ज की जा रही है। ऐसे में जनवरी–मार्च 2026 के दौरान औसत से ज्यादा तापमान रहने की संभावना है। इससे बारिश का पैटर्न भी प्रभावित होने की संभावना है।

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