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तिकुनिया में सजा अखिल भारतीय विराट कवि सम्मेलन, श्रोता देर रात तक हुए मंत्रमुग्ध

तिकुनिया-खीरी। श्री जनता रामलीला कमेटी, तिकुनिया द्वारा आयोजित रामलीला मेले में सोमवार की रात अखिल भारतीय विराट कवि सम्मेलन का भव्य आयोजन किया गया। मेले के पूर्व अध्यक्ष स्व. अखिलेश गुप्ता की स्मृति में आयोजित इस सम्मेलन में कवियों ने भक्ति, वीर और हास्य रस की ऐसी धारा बहाई कि श्रोता देर रात तक तालियां  बजाते रहे।


कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में भाजपा जिलाध्यक्ष अरविन्द गुप्ता तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में निघासन विधायक शशांक वर्मा शामिल हुए। मेला अध्यक्ष डॉ. दिनेश गुप्ता नीटू ने सभी अतिथियों का स्वागत किया।


कवि सम्मेलन का संचालन रामकिशोर तिवारी (बाराबंकी) ने किया।


सबसे पहले प्रख्यात मिश्रा (लखनऊ) ने वीर रस में अपनी ओजस्वी रचना से कार्यक्रम का शुभारंभ किया और पंडाल में जोश भर दिया -


लोकतंत्र के सपनों को साकार बनाने वाले हैं

जनतंत्री स्तंभों का आधार बनाने वाले हैं,

राजनीति की वैतरणी को पार कराने वाले हैं,

राम वही जो यू.पी. की सरकार बनाने वाले हैं।


इसके बाद रामकिशोर तिवारी (बाराबंकी) ने अपनी भक्ति रचना सुनाई -

राम की छवि हृदय में उतारा करूँ,

रूप सुन्दर सलोना निहारा करूँ।_

कामना बस यही है जनम दर जनम,_

मैं सियाराम के पग पखारा करूँ।_


उनकी इस प्रस्तुति पर पूरा पंडाल राममय हो गया और जय श्रीराम के जयकारे गूंज उठे।


इसके बाद शिवकुमार व्यास (बाराबंकी) ने वीर रस की कविताओं से युवाओं में जोश भर दिया। उन्होंने सुनाया -


तन से हूँ कमजोर लेकिन मन शिवाला है,_

लीक से हटकर चलन का शौक पाला,_

भीख में ले रोशनी मैं चाँद सा दिखता नहीं,_

हूँ भले जुगनू मगर अपना उजाला है।_


दिव्या शुक्ला (लखनऊ) ने कविता की गरिमा पर अपनी रचना सुनाई, जिस पर श्रोताओं ने खूब तालियां बजाईं -


निहित मद हो गया, जिसमें उसे प्रभुता नहीं कहना,

तिमिर जो हर नहीं पाया उसे सविता नहीं कहना,

अगर दम तोड़ कर भाषा की मर्यादा को लांघो तो,

उसे कुछ और कह देना, मगर कविता नहीं कहना।


हास्य कवि धर्मराज कविशायर (श्रावस्ती)ने अपनी अवधी बोली की रचना से श्रोताओं को हंसा-हंसा कर लोटपोट कर दिया -


> _नवम्बर जस मजा जनवरी मा न पइहव,_

> _गद्धा जस मजा दरी मा न पइहव,_

> _ठाँस के पिस्टल बुलट से चलिहव,_

> _दरोगा जस मजा मास्टरी मा न पइहव।_


अंत में तिकुनिया के हास्य कवि सहजराम जायसवाल ने पत्नी की आरती सुनाकर समां बांध दिया -


जय जय पत्नी रानी,

करती अपनी मनमानी,

रौद्र रूप निश-दिन धारती,

मेरे मुन्ने की मम्मी,

तेरी आरती।


उनकी इस हास्य प्रस्तुति पर पूरा पंडाल हंसी से गूंज उठा।


अंत में मेला अध्यक्ष डॉ. दिनेश गुप्ता ने सभी कवियों, अतिथियों व श्रोताओं का आभार व्यक्त किया और कहा कि ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी भाषा, संस्कृति और साहित्य से जोड़ने का काम करते हैं।

इस अवसर पर कमेटी के कार्यवाहक अध्यक्ष जितेंद्र गुप्ता,उपाध्यक्ष अनुज गुप्ता,अशोक निषाद,कृष्णा सिंह, किशन महावर,शिशिर गुप्ता,सुधांशु पंत,सुनील श्रीवास्तव, राजाराम मौर्य,आशीष गर्ग,अशोक अग्रवाल, विकास मिश्रा, सचिन जायसवाल, हनी गुप्ता सहित तमाम लोग मौजूद रहे।


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