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मोहाना नदी उफनाई, सीमा क्षेत्र में मची हलचल; नयापिंड में नाव बनी सहारा, रेलवे लाइन पर मंडराया खतरा



 तिकुनियां-खीरी। वर्षों से सीमाई भूगोल बदलती आ रही मोहाना नदी का जलस्तर बढ़ने के साथ ही भारत-नेपाल सीमा क्षेत्र में एक बार फिर हलचल मच गई है। नयापिंड गांव में पानी घरों की दहलीज तक पहुंच गया है। ग्रामीण रोजमर्रा का सामान खरीदने के लिए नाव का सहारा ले रहे हैं। वहीं स्कूली बच्चों के लिए भी नाव ही आवागमन का एकमात्र साधन रह गई है। रननगर और खखरौला क्षेत्र में भी नदी का पानी पहुंचने लगा है।

रविवार देर शाम मोहाना नदी का जलस्तर बढ़ने से खखरौला एसएसबी कैंप के आगे पड़ने वाले रपटा पुल पर पानी चलने लगा। रननगर एसएसबी कैंप के पीछे भी नदी का पानी पहुंच चुका है। खैरटिया के मजरा नयापिंड में जलस्तर बढ़ने से गांव के कई घरों की दहलीज तक पानी पहुंच गया है। ग्रामीणों का कहना है कि हर वर्ष बरसात के दौरान उन्हें इसी समस्या से जूझना पड़ता है, लेकिन स्थायी समाधान नहीं हो सका।

गांव निवासी कमल सिंह, बूटा सिंह, बिट्टू, गज्जन सिंह, सूरज सिंह, सुरेंद्र सिंह और वीर सिंह आदि ने बताया कि बाढ़ और जलभराव की समस्या हर साल आती है। ग्रामीणों के मुताबिक वर्ष 2023 में सरकार की ओर से रहने के लिए बंधे के दक्षिण में जमीन उपलब्ध कराई गई थी, लेकिन वहां भी करीब तीन फुट पानी भरा हुआ है। ऐसे में वहां जाकर रहने का कोई फायदा नहीं है।

ग्रामीणों ने बताया कि गाटा संख्या 127 और 116 घ सरकार की भूमि है। यह जमीन ऊंचाई पर है, लेकिन ग्रामीणों के अनुसार उस पर किसी का कब्जा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि उक्त सरकारी जमीन को रहने के लिए उपलब्ध करा दिया जाए तो बाढ़ की समस्या से प्रभावित परिवारों को राहत मिल सकती है।

जसनगर में कटान करती मोहाना रेलवे लाइन की ओर बढ़ी

बीते तीन दिनों से हो रही बारिश और नेपाल के पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार बारिश के बाद मोहाना और कर्णाली नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। जसनगर के पास मोहाना नदी तेजी से कटान कर रही है। कटान करते-करते नदी रेलवे लाइन की सुरक्षा के लिए बनाए गए बांध तक पहुंच गई है।

ग्रामीणों के मुताबिक यदि नदी के कटान से सुरक्षा बांध क्षतिग्रस्त हुआ तो रायबोझा-मैलानी रेल लाइन के लिए खतरा पैदा हो सकता है। नदी के लगातार बढ़ते जलस्तर और कटान को लेकर आसपास के गांवों में दहशत का माहौल है।

सिंचाई विभाग के प्रयासों पर भी सवाल

सीमाई क्षेत्र में बहने वाली मोहाना नदी नेपाल की नदियों के पानी के साथ मिलकर हर वर्ष भारतीय क्षेत्र में तबाही मचाती है। ग्रामीणों का आरोप है कि नदी के कटान और बाढ़ को रोकने के लिए सिंचाई विभाग की ओर से वर्षों से किए जा रहे प्रयास स्थायी साबित नहीं हुए। नदी का कटान कई बार बनाए गए बचाव कार्यों को अपने साथ बहा ले गया।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते नदी के कटान को रोकने के लिए ठोस और स्थायी इंतजाम नहीं किए गए तो इस बार स्थिति और गंभीर हो सकती है। खासकर जसनगर के पास रेलवे लाइन की सुरक्षा को लेकर ग्रामीण चिंतित हैं।

रिपोर्ट: संतोष मिश्र तिकोनिया

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