मंगलवार को परियोजना समन्वयक विजय कुमार पाण्डेय एवं क्षेत्रीय समन्वयक रमाशंकर के नेतृत्व में दुधवा टाइगर रिजर्व प्रभाग, पलिया-खीरी के आसपास स्थित थारू जनजाति के 15 गांवों की 15 महिला सदस्यों के दल को सिरोही, मुजफ्फरनगर के लिए रवाना किया गया। दल में सोनहा, बंदरभरारी, ध्यानपुर, सिकलपुरा, तारभूषी, चंदनचौकी, रामनगर, पुरैना, बेलडांडी, धुसकिया, पचपेड़ा, बरबटा, मुड़नोचनी, पोया एवं मौरा गांव की महिलाएं शामिल हैं।
मुख्यालय दुधवा टाइगर रिजर्व प्रभाग, पलिया-खीरी में आयोजित कार्यक्रम में उपनिदेशक जगदीश आर. ने महिला सदस्यों को संबोधित करते हुए कहा कि भ्रमण के दौरान वे सिरोही एनजीओ द्वारा हस्तशिल्प एवं अन्य उत्पादों के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों का बारीकी से अवलोकन करें। उन्होंने उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार, आकर्षक पैकेजिंग, डिजाइन, ब्रांडिंग और बाजार उपलब्धता से संबंधित व्यावहारिक जानकारी हासिल करने पर जोर दिया।
उपनिदेशक ने महिला सदस्यों को शुभकामनाएं देते हुए परियोजना समन्वयक विजय कुमार पाण्डेय के साथ हरी झंडी दिखाकर दल को रवाना किया।
भ्रमण के दौरान महिलाओं को ग्राहकों की जरूरत के अनुरूप हस्तशिल्प उत्पादों को आकर्षक बनाने, प्रभावी पैकेजिंग, डिजाइन एवं ब्रांडिंग तथा विभिन्न बाजारों में उत्पादों की मार्केटिंग और बिक्री के तौर-तरीकों की जानकारी दी जाएगी। पूर्व जायका परियोजना में कार्य कर चुकीं श्रीमती शिवकुमारी एवं डिजाइनर श्रीमती आरती भी महिला सदस्यों के साथ रहेंगी।
चार दिवसीय यह परिचयात्मक भ्रमण 18 अगस्त से शुरू होकर 21 अगस्त 2026 को वापस होगा। गोरखपुर इनवायरमेंटल एक्शन ग्रुप का उद्देश्य थारू महिलाओं द्वारा घरेलू स्तर पर किए जा रहे हस्तशिल्प कार्यों को कौशल, डिजाइन, गुणवत्ता और बाजार की दृष्टि से सुदृढ़ करना है, जिससे उनके उत्पादों को बेहतर बाजार मिल सके और आय में वृद्धि हो।
इस पहल से थारू जनजाति की महिलाओं के लिए स्वरोजगार के नए अवसर पैदा होने, आर्थिक आत्मनिर्भरता बढ़ने और पारंपरिक हस्तशिल्प कला के संरक्षण एवं संवर्धन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
रिपोर्ट: शकील खान

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