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मोहाना के कटान ने बढ़ाई बंधे और रेलवे ट्रैक की चिंता, 15 वर्षों में कई गांवों का मिटा वजूद

तिकुनियां-खीरी। पड़ोसी देश नेपाल से आने वाली नदियों के तेज प्रवाह ने एक बार फिर भारत-नेपाल सीमा के तराई क्षेत्र में बसे गांवों की चिंता बढ़ा दी है। मोहाना नदी का रुख अब बंधे की ओर हो गया है। नदी के लगातार हो रहे कटान से न केवल बंधे पर खतरा मंडराने लगा है, बल्कि समीप स्थित रेलवे ट्रैक की सुरक्षा को लेकर भी ग्रामीण चिंतित हैं।

ग्रामीणों का आरोप है कि मोहाना नदी के कटान को रोकने के लिए सिंचाई विभाग द्वारा करोड़ों रुपये खर्च कर बनाई गई योजनाएं नदी के तेज वेग के सामने टिक नहीं सकीं और अधिकांश कार्य नदी में समा गया। किसानों का कहना है कि यदि समय रहते नदी की धारा को नियंत्रित करने के लिए ठोस और व्यापक योजना नहीं बनाई गई तो आने वाले समय में दर्जनों गांवों और हजारों हेक्टेयर कृषि भूमि पर संकट खड़ा हो सकता है।


ग्रामीणों के अनुसार पड़ोसी देश नेपाल की सबसे लंबी नदियों में शामिल करनाली का तेज प्रवाह मोहाना नदी में मिलने के बाद नदी का वेग अत्यधिक बढ़ जाता है। इसके बाद यही नदी भारतीय क्षेत्र में पहुंचकर लगातार कटान करती है। पिछले करीब 15 वर्षों में मोहाना नदी कई गांवों का अस्तित्व मिटा चुकी है और हर वर्ष बड़ी संख्या में किसानों की उपजाऊ जमीन को अपने आगोश में लेती जा रही है।

किसान सतविंदर सिंह पाला, स्वर्णजीत सिंह और सज्जन सिंह ने बताया कि नदी को रोकने के लिए बनाई गई योजनाओं में नदी की वास्तविक स्थिति और उसके प्रवाह को पर्याप्त रूप से ध्यान में नहीं रखा गया। इसका खामियाजा क्षेत्र के किसान और ग्रामीण भुगत रहे हैं। उन्होंने बताया कि गुरुद्वारा कौड़ियाला के पूर्व मोहाना और करनाली नदियों का संगम होता है। किसानों का मानना है कि कटान रोकने के लिए कार्य इसी संगम क्षेत्र से शुरू कर नदी की धारा को नियंत्रित और मोड़ने की योजना बनाई जानी चाहिए।

किसान भगवंत सिंह और नक्षत्र सिंह ने बताया कि जिस तेजी से मोहाना नदी बंधे की ओर कटान कर रही है, उससे बंधे के भविष्य को लेकर चिंता बढ़ गई है। उनका कहना है कि यदि बंधे को नुकसान पहुंचा तो हजारों हेक्टेयर कृषि भूमि, दर्जनों गांव और करीब 50 हजार से अधिक आबादी प्रभावित हो सकती है।

ग्रामीणों ने बताया कि बंधे को बचाने के लिए पहले करीब डेढ़ मीटर खुदाई कर तार के जालों में पत्थर भरकर ठोकरें बनाई गई थीं, लेकिन नदी कई स्थानों पर 30 से 40 फुट तक गहराई में कटान कर रही है। ऐसे में ग्रामीणों का सवाल है कि मौजूदा सुरक्षा कार्य नदी के लगातार बढ़ते दबाव को कब तक झेल पाएंगे।

खैरटिया के प्रधान प्रगट सिंह ने कहा कि जब तक नदी किनारे मजबूत और पक्की ठोकरों का निर्माण नहीं होगा, तब तक मोहाना के कटान को रोकना मुश्किल है। वहीं जसनगर के पूर्व प्रधान सुरेश तलवार ने बताया कि क्षेत्र के लोग वर्ष 1972 से लगातार नदी कटान की समस्या झेल रहे हैं। गांव की बड़ी मात्रा में कृषि भूमि नदी में समा चुकी है या नदी के उस पार चली गई है। रोजगार के अभाव में गांव के कई लोग बाहर जाकर मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि अब नदी एक बार फिर गांवों की ओर बढ़ रही है और इसे रोकने के लिए छोटी योजनाओं के बजाय दीर्घकालिक और बड़ी परियोजना की आवश्यकता है।

इस संबंध में सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता कनक पाल गंगवार ने बताया कि नदी का जलस्तर पहले बढ़ा हुआ था, जो अब कम होने लगा है। कटान की आशंका को देखते हुए बांध रोड के किनारे ईंटों से ठोकर बनाने का कार्य कराया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि इस कार्य से काफी हद तक कटान रोकने में सफलता मिल रही है।

रिपोर्ट : संतोष मिश्रा

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