संपादकीय
लखीमपुर खीरी
सरकार एक ओर ग्रामीण अंचलों में शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए खेल-कूद के उपकरण उपलब्ध करा रही है, लेकिन दूसरी ओर बुनियादी सुविधाओं का अभाव शिक्षा व्यवस्था की सच्चाई उजागर कर रहा है। कस्बाई क्षेत्रों के कई विद्यालय आज भी मूलभूत संसाधनों से वंचित हैं—कहीं बाउंड्रीवाल नहीं है तो कहीं जर्जर भवन बच्चों के लिए खतरा बना हुआ है।
नगर पंचायत सिंगाही-भेड़ौरा के वार्ड नंबर तीन स्थित बाढ़ियन टोला के सिविलियन विद्यालय की स्थिति अत्यंत चिंताजनक है। लगभग 365 बच्चों वाले इस विद्यालय में पढ़ाई की व्यवस्था बेहद सीमित संसाधनों में की जा रही है। विद्यालय परिसर के पूरब दिशा में बिजली पावर हाउस स्थित है, जिससे सुरक्षा की चिंता और बढ़ जाती है।
सबसे गंभीर स्थिति विद्यालय भवन की है, जहां उच्च प्राथमिक विद्यालय की इमारत की छत पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है। इसके चलते चार कमरे पूरी तरह से अनुपयोगी हो गए हैं। वर्तमान में केवल दो कमरों में ही पढ़ाई संचालित हो रही है, जो इतने बच्चों के लिए नाकाफी है। मजबूरी में विद्यालय प्रबंधन ने आपसी सहयोग से टीनशेड डलवाकर बच्चों की पढ़ाई की व्यवस्था की है।
विद्यालय के प्रधानाचार्य विजय वर्मा के अनुसार, यहां चार अध्यापक और दो अनुदेशक कार्यरत हैं, जिससे शैक्षणिक गुणवत्ता प्रभावित नहीं है, लेकिन बैठने के लिए पर्याप्त स्थान न होने के कारण पढ़ाई सुचारु रूप से नहीं हो पा रही।
बाउंड्रीवाल के अभाव में विद्यालय परिसर में अक्सर मवेशियों का प्रवेश हो जाता है, जिससे बच्चों की सुरक्षा पर लगातार खतरा बना रहता है। इस संबंध में कई बार विभाग को सूचित किया जा चुका है, लेकिन अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
जब इस मुद्दे पर निघासन खंड शिक्षा अधिकारी धर्मेश यादव से बात की गई, तो उन्होंने बताया कि जर्जर भवन के ध्वस्तीकरण के लिए नीलामी प्रक्रिया चल रही है। हालांकि, अभी तक इस संबंध में कोई अंतिम आदेश जारी नहीं हुआ है। उनका कहना है कि पुरानी इमारत हटने के बाद नई इमारत का निर्माण कराया जाएगा।
नगर पंचायत अध्यक्ष मोहम्मद क़य्यूम ने बताया कि इस्टीमेट बनाकर शासन को भेज दिया गया है और धनराशि प्राप्त होते ही निर्माण कार्य शुरू कराया जाएगा।
सूरज कनौजिया
नगर पंचायत सिंगाही के वार्ड नं तीन के सभासद प्रतिनिधि सूरज कनौजिया ने बताया कि बाउंड्रीवाल निर्माण के लिए बोर्ड बैठक में प्रस्ताव रखा गया है और व्यक्तिगत रूप से नगर पंचायत अध्यक्ष से भी मांग की गई है।
तराई की आवाज के संपादक प्रेम बाजपेई की विशेष संपादकीय रिपोर्ट
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